Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.119.96-98h: उनके वचन सुनकर गंगानन्दन भीष्म बोले, ‘मैं अभी जीवित हूँ।’ कुरुवंश के वृद्ध पितामह भीष्म पृथ्वी पर गिरकर भी प्राण धारण किए हुए उत्तरायण की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उनका अभिप्राय जानकर हिमालयनन्दिनी गंगादेवी ने हंसों का रूप धारण करके महर्षियों को वहाँ भेजा। 96-97 1/2। | mahabharat अध्याय 6.119: कौरवपक्षके प्रमुख महारथियोंद्वारा सुरक्षित होनेपर भी अर्जुनका भीष्मको रथसे गिराना, शरशय्यापर स्थित भीष्मके समीप हंसरूपधारी ऋषियोंका आगमन एवं उनके कथनसे भीष्मका उत्तरायणकी प्रतीक्षा करते हुए प्राण धारण करना । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स्थितोऽस्मीति च गाङ्गेयस्तच्छ्रुत्वा वाक्यमब्रवीत्।
धारयामास च प्राणान् पतितोऽपि महीतले॥ ९६॥
उत्तरायणमन्विच्छन् भीष्म: कुरुपितामह:।
तस्य तन्मतमाज्ञाय गंगा हिमवत: सुता॥ ९७॥
महर्षीन् हंसरूपेण प्रेषयामास तत्र वै।
अनुवाद
उनके वचन सुनकर गंगानन्दन भीष्म बोले, ‘मैं अभी जीवित हूँ।’ कुरुवंश के वृद्ध पितामह भीष्म पृथ्वी पर गिरकर भी प्राण धारण किए हुए उत्तरायण की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उनका अभिप्राय जानकर हिमालयनन्दिनी गंगादेवी ने हंसों का रूप धारण करके महर्षियों को वहाँ भेजा। 96-97 1/2।
Hearing his words, Ganganandan Bhishma said, 'I am still alive.' The old patriarch of the Kuru clan, Bhishma, even after falling on the earth, is holding on to his life, waiting for Uttarayan. Knowing his intention, Himalayanandini Gangadevi sent the great sages there in the form of swans. 96-97 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥