श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 119: कौरवपक्षके प्रमुख महारथियोंद्वारा सुरक्षित होनेपर भी अर्जुनका भीष्मको रथसे गिराना, शरशय्यापर स्थित भीष्मके समीप हंसरूपधारी ऋषियोंका आगमन एवं उनके कथनसे भीष्मका उत्तरायणकी प्रतीक्षा करते हुए प्राण धारण करना  »  श्लोक 93
 
 
श्लोक  6.119.93 
अभ्यवर्षच्च पर्जन्य: प्राकम्पत च मेदिनी।
पतन् स ददृशे चापि दक्षिणेन दिवाकरम्॥ ९३॥
 
 
अनुवाद
आकाश से मेघ बरसने लगे, पृथ्वी काँपने लगी और गिरते समय उसने देखा कि सूर्य अभी भी दक्षिण दिशा में है (यह मरने का अच्छा समय नहीं था)।॥ 93॥
 
The clouds began to rain from the sky, the earth began to tremble, and as he was falling he saw that the Sun was still in the southern direction (this was not a good time to die).॥ 93॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)