Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.119.90-91: महाबली भीष्म सभी धनुर्धरों में श्रेष्ठ थे। वे इंद्र की कटी हुई ध्वजा के समान पृथ्वी को गुंजायमान करते हुए गिरे। उनके शरीर के सभी अंग बाणों से छिदे हुए थे। अतः गिरने के बाद भी वे भूमि पर नहीं गिरे। | mahabharat अध्याय 6.119: कौरवपक्षके प्रमुख महारथियोंद्वारा सुरक्षित होनेपर भी अर्जुनका भीष्मको रथसे गिराना, शरशय्यापर स्थित भीष्मके समीप हंसरूपधारी ऋषियोंका आगमन एवं उनके कथनसे भीष्मका उत्तरायणकी प्रतीक्षा करते हुए प्राण धारण करना । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स पपात महाबाहुर्वसुधामनुनादयन्॥ ९०॥
इन्द्रध्वज इवोत्सृष्ट: केतु: सर्वधनुष्मताम्।
धरणीं न स पस्पर्श शरसंघै: समावृत:॥ ९१॥
अनुवाद
महाबली भीष्म सभी धनुर्धरों में श्रेष्ठ थे। वे इंद्र की कटी हुई ध्वजा के समान पृथ्वी को गुंजायमान करते हुए गिरे। उनके शरीर के सभी अंग बाणों से छिदे हुए थे। अतः गिरने के बाद भी वे भूमि पर नहीं गिरे।
The mighty Bhishma was the best among all archers. He fell down making the earth resound like the cut flag of Indra. All his body parts were pierced with arrows. Therefore, even after falling, he did not touch the ground.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥