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mahabharat 6.119.88-89h: जब भीष्म रथ से गिर पड़े, तब आकाश में खड़े देवता और पृथ्वी पर के राजा बड़े हाहाकार से चिल्ला उठे।   |   mahabharat अध्याय 6.119: कौरवपक्षके प्रमुख महारथियोंद्वारा सुरक्षित होनेपर भी अर्जुनका भीष्मको रथसे गिराना, शरशय्यापर स्थित भीष्मके समीप हंसरूपधारी ऋषियोंका आगमन एवं उनके कथनसे भीष्मका उत्तरायणकी प्रतीक्षा करते हुए प्राण धारण करना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 119: कौरवपक्षके प्रमुख महारथियोंद्वारा सुरक्षित होनेपर भी अर्जुनका भीष्मको रथसे गिराना, शरशय्यापर स्थित भीष्मके समीप हंसरूपधारी ऋषियोंका आगमन एवं उनके कथनसे भीष्मका उत्तरायणकी प्रतीक्षा करते हुए प्राण धारण करना  »  श्लोक 88-89h
 
 
श्लोक  6.119.88-89h 
हाहेति दिवि देवानां पार्थिवानां च भारत॥ ८८॥
पतमाने रथाद् भीष्मे बभूव सुमहास्वन:।
 
 
अनुवाद
जब भीष्म रथ से गिर पड़े, तब आकाश में खड़े देवता और पृथ्वी पर के राजा बड़े हाहाकार से चिल्ला उठे।
 
When Bhishma fell from the chariot, the gods standing in the sky and the kings on earth cried out in great uproar. 88 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)