Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.119.86: महाराज! युद्ध में सैकड़ों-हजारों योद्धाओं का वध करने के बाद भीष्म स्वयं ऐसी स्थिति में पहुँच गए थे कि उनके शरीर पर दो इंच भी ऐसी जगह नहीं बची थी जो बाणों से छेदी न गई हो। | mahabharat अध्याय 6.119: कौरवपक्षके प्रमुख महारथियोंद्वारा सुरक्षित होनेपर भी अर्जुनका भीष्मको रथसे गिराना, शरशय्यापर स्थित भीष्मके समीप हंसरूपधारी ऋषियोंका आगमन एवं उनके कथनसे भीष्मका उत्तरायणकी प्रतीक्षा करते हुए प्राण धारण करना । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
निहत्य समरे राजन् शतशोऽथ सहस्रश:।
न तस्यासीदनिर्भिन्नं गात्रे द्वॺङ्गुलमन्तरम्॥ ८६॥
अनुवाद
महाराज! युद्ध में सैकड़ों-हजारों योद्धाओं का वध करने के बाद भीष्म स्वयं ऐसी स्थिति में पहुँच गए थे कि उनके शरीर पर दो इंच भी ऐसी जगह नहीं बची थी जो बाणों से छेदी न गई हो।
Maharaj! After killing hundreds and thousands of warriors in the war, Bhishma himself had reached such a state that not even two inches of space was left on his body that had not been pierced by arrows.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥