Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.119.81-83: सौवीर, कितव, प्राच्य, प्रतीच्य, उदीच्य, मालव, अभिषह, शूरसेन, शिबि, वसति, शाल्वश्रय, त्रिगर्त, अम्बष्ठ और केकय - इन सभी देशों के महामनस्वी वीर बाणों से घायल होकर तथा घावों से पीड़ित होकर भी युद्धस्थल में अर्जुन के साथ युद्ध करने वाले भीष्म को नहीं छोड़ सके ॥81-83॥ | mahabharat अध्याय 6.119: कौरवपक्षके प्रमुख महारथियोंद्वारा सुरक्षित होनेपर भी अर्जुनका भीष्मको रथसे गिराना, शरशय्यापर स्थित भीष्मके समीप हंसरूपधारी ऋषियोंका आगमन एवं उनके कथनसे भीष्मका उत्तरायणकी प्रतीक्षा करते हुए प्राण धारण करना । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सौवीर, कितव, प्राच्य, प्रतीच्य, उदीच्य, मालव, अभिषह, शूरसेन, शिबि, वसति, शाल्वश्रय, त्रिगर्त, अम्बष्ठ और केकय - इन सभी देशों के महामनस्वी वीर बाणों से घायल होकर तथा घावों से पीड़ित होकर भी युद्धस्थल में अर्जुन के साथ युद्ध करने वाले भीष्म को नहीं छोड़ सके ॥81-83॥
Sauvir, Kitava, Prachya, Pratichya, Udichya, Malava, Abhishah, Shurasena, Shibi, Vasati, Shalvaashraya, Trigarta, Ambastha and Kekaya - all these great-minded heroes of all these countries, despite being wounded by arrows and suffering from wounds, could not leave Bhishma who fought with Arjuna in the battlefield. 81-83॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥