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mahabharat 6.119.8-9h: प्रजानाथ! तत्पश्चात् पांचालराज द्रुपद और धृष्टकेतु ने किसी बात की परवाह न करके पाण्डव सेना में प्रवेश किया। 8 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 6.119: कौरवपक्षके प्रमुख महारथियोंद्वारा सुरक्षित होनेपर भी अर्जुनका भीष्मको रथसे गिराना, शरशय्यापर स्थित भीष्मके समीप हंसरूपधारी ऋषियोंका आगमन एवं उनके कथनसे भीष्मका उत्तरायणकी प्रतीक्षा करते हुए प्राण धारण करना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 119: कौरवपक्षके प्रमुख महारथियोंद्वारा सुरक्षित होनेपर भी अर्जुनका भीष्मको रथसे गिराना, शरशय्यापर स्थित भीष्मके समीप हंसरूपधारी ऋषियोंका आगमन एवं उनके कथनसे भीष्मका उत्तरायणकी प्रतीक्षा करते हुए प्राण धारण करना  »  श्लोक 8-9h
 
 
श्लोक  6.119.8-9h 
तत: पञ्चालराजं च धृष्टकेतुमचिन्त्य च॥ ८॥
पाण्डवानीकिनीमध्यमाससाद विशाम्पते।
 
 
अनुवाद
प्रजानाथ! तत्पश्चात् पांचालराज द्रुपद और धृष्टकेतु ने किसी बात की परवाह न करके पाण्डव सेना में प्रवेश किया। 8 1/2॥
 
Prajanath! After that, Panchala king Drupada and Dhrishketu did not care about anything and entered into the Pandava army. 8 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)