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श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 119: कौरवपक्षके प्रमुख महारथियोंद्वारा सुरक्षित होनेपर भी अर्जुनका भीष्मको रथसे गिराना, शरशय्यापर स्थित भीष्मके समीप हंसरूपधारी ऋषियोंका आगमन एवं उनके कथनसे भीष्मका उत्तरायणकी प्रतीक्षा करते हुए प्राण धारण करना  »  श्लोक 78-79h
 
 
श्लोक  6.119.78-79h 
समं च विषमं चैव न प्राज्ञायत किंचन।
योधानामयुतं हत्वा तस्मिन् स दशमेऽहनि॥ ७८॥
अतिष्ठदाहवे भीष्मो भिद्यमानेषु मर्मसु।
 
 
अनुवाद
वहाँ ऊँच-नीच का भेद भी नहीं किया जा सकता था। दसवें दिन के उस युद्ध में, यद्यपि उनके प्राण छिदे जा रहे थे, फिर भी भीष्म जी दस हजार योद्धाओं का वध करके वहीं खड़े रहे।
 
There one could not even make out the difference between high and low. In that battle on the tenth day, even though his vital spots were being pierced, Bhishma ji was standing there after killing ten thousand warriors. 78 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)