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mahabharat 6.119.69-70h: भरतपुत्र! समस्त कौरव योद्धाओं के सामने गंगापुत्र भीष्म ने स्वर्ण-मंडित ढाल और तलवार हाथ में लेकर मृत्यु या विजय में से एक चुनने का निश्चय किया।   |   mahabharat अध्याय 6.119: कौरवपक्षके प्रमुख महारथियोंद्वारा सुरक्षित होनेपर भी अर्जुनका भीष्मको रथसे गिराना, शरशय्यापर स्थित भीष्मके समीप हंसरूपधारी ऋषियोंका आगमन एवं उनके कथनसे भीष्मका उत्तरायणकी प्रतीक्षा करते हुए प्राण धारण करना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 119: कौरवपक्षके प्रमुख महारथियोंद्वारा सुरक्षित होनेपर भी अर्जुनका भीष्मको रथसे गिराना, शरशय्यापर स्थित भीष्मके समीप हंसरूपधारी ऋषियोंका आगमन एवं उनके कथनसे भीष्मका उत्तरायणकी प्रतीक्षा करते हुए प्राण धारण करना  »  श्लोक 69-70h
 
 
श्लोक  6.119.69-70h 
पश्यतां कुरुवीराणां सर्वेषां तव भारत।
चर्माथादत्त गाङ्गेयो जातरूपपरिष्कृतम्॥ ६९॥
खड्गं चान्यतरप्रेप्सुर्मृत्योरग्रे जयाय वा।
 
 
अनुवाद
भरतपुत्र! समस्त कौरव योद्धाओं के सामने गंगापुत्र भीष्म ने स्वर्ण-मंडित ढाल और तलवार हाथ में लेकर मृत्यु या विजय में से एक चुनने का निश्चय किया।
 
Bharata's son! In front of all the Kaurava warriors, Ganga's son Bhishma took the golden-decorated shield and sword in his hands to choose either death or victory. 69 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)