Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.119.65-66h: ये बाण मेरे नाभि-स्थानों में घुस रहे हैं, इसलिए ये शिखंडी के नहीं हैं। ये अर्जुन के बाण हैं। ये शिखंडी के बाण नहीं हैं। जैसे केकड़े के बच्चे अपनी माँ के पेट को भेदकर बाहर आ जाते हैं, वैसे ही ये बाण मेरे शरीर के सभी अंगों को भेद रहे हैं। 65 1/2। | mahabharat अध्याय 6.119: कौरवपक्षके प्रमुख महारथियोंद्वारा सुरक्षित होनेपर भी अर्जुनका भीष्मको रथसे गिराना, शरशय्यापर स्थित भीष्मके समीप हंसरूपधारी ऋषियोंका आगमन एवं उनके कथनसे भीष्मका उत्तरायणकी प्रतीक्षा करते हुए प्राण धारण करना । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ये बाण मेरे नाभि-स्थानों में घुस रहे हैं, इसलिए ये शिखंडी के नहीं हैं। ये अर्जुन के बाण हैं। ये शिखंडी के बाण नहीं हैं। जैसे केकड़े के बच्चे अपनी माँ के पेट को भेदकर बाहर आ जाते हैं, वैसे ही ये बाण मेरे शरीर के सभी अंगों को भेद रहे हैं। 65 1/2।
‘These arrows are entering my vital spots, hence they are not Shikhandi's. These are Arjun's arrows. These are not Shikhandi's arrows. Just like the young crabs come out by piercing their mother's abdomen, in the same way these arrows pierce all my body parts. 65 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥