Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.119.61-62: ये बाण मेरे सुदृढ़ कवच को भेदकर मेरे प्राणों पर प्रहार करने के कारण मेरे शरीर पर मूसल के समान चोट पहुँचा रहे हैं। इनका स्पर्श वज्र या यमदंड के समान असह्य है। इनका वेग वज्र के समान है और इन्हें रोकना कठिन है। ये निश्चय ही शिखण्डी के बाण नहीं हैं। 61-62 | mahabharat अध्याय 6.119: कौरवपक्षके प्रमुख महारथियोंद्वारा सुरक्षित होनेपर भी अर्जुनका भीष्मको रथसे गिराना, शरशय्यापर स्थित भीष्मके समीप हंसरूपधारी ऋषियोंका आगमन एवं उनके कथनसे भीष्मका उत्तरायणकी प्रतीक्षा करते हुए प्राण धारण करना । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ये बाण मेरे सुदृढ़ कवच को भेदकर मेरे प्राणों पर प्रहार करने के कारण मेरे शरीर पर मूसल के समान चोट पहुँचा रहे हैं। इनका स्पर्श वज्र या यमदंड के समान असह्य है। इनका वेग वज्र के समान है और इन्हें रोकना कठिन है। ये निश्चय ही शिखण्डी के बाण नहीं हैं। 61-62
‘Because they are piercing my strong armour and striking my vital spots, these arrows strike my body like a pestle. Their touch is unbearable like a thunderbolt or Yamdanda. Their speed is like that of a thunderbolt and it is difficult to ward off them. These are certainly not the arrows of Shikhandi. 61-62.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥