Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.119.57-58h: ‘उसे वज्रधारी इन्द्र भी युद्ध में नहीं हरा सकते। इसी प्रकार यदि समस्त देवता, दैत्य और राक्षस मिलकर भी मुझे युद्ध में नहीं हरा सकते; फिर अन्य मानव योद्धाओं की तो बात ही क्या?’॥57 1/2॥ | mahabharat अध्याय 6.119: कौरवपक्षके प्रमुख महारथियोंद्वारा सुरक्षित होनेपर भी अर्जुनका भीष्मको रथसे गिराना, शरशय्यापर स्थित भीष्मके समीप हंसरूपधारी ऋषियोंका आगमन एवं उनके कथनसे भीष्मका उत्तरायणकी प्रतीक्षा करते हुए प्राण धारण करना । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न चैष समरे शक्यो जेतुं वज्रभृता अपि।
न चापि सहिता वीरा देवदानवराक्षसा:॥ ५७॥
मां चापि शक्ता निर्जेतुं किमु मर्त्या महारथा:।
अनुवाद
‘उसे वज्रधारी इन्द्र भी युद्ध में नहीं हरा सकते। इसी प्रकार यदि समस्त देवता, दैत्य और राक्षस मिलकर भी मुझे युद्ध में नहीं हरा सकते; फिर अन्य मानव योद्धाओं की तो बात ही क्या?’॥57 1/2॥
‘Even the thunderbolt-wielding Indra cannot defeat him in battle. Similarly, if all the gods, demons and monster warriors come together, they cannot defeat me in battle; then what about other human warriors?’॥ 57 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥