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mahabharat 6.119.54-55h: तब शान्तनु नंदन भीष्म ने अर्जुन पर हाथ उठाना छोड़ दिया। तब भी अर्जुन ने उन्हें 25 बाण मारे।   |   mahabharat अध्याय 6.119: कौरवपक्षके प्रमुख महारथियोंद्वारा सुरक्षित होनेपर भी अर्जुनका भीष्मको रथसे गिराना, शरशय्यापर स्थित भीष्मके समीप हंसरूपधारी ऋषियोंका आगमन एवं उनके कथनसे भीष्मका उत्तरायणकी प्रतीक्षा करते हुए प्राण धारण करना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 119: कौरवपक्षके प्रमुख महारथियोंद्वारा सुरक्षित होनेपर भी अर्जुनका भीष्मको रथसे गिराना, शरशय्यापर स्थित भीष्मके समीप हंसरूपधारी ऋषियोंका आगमन एवं उनके कथनसे भीष्मका उत्तरायणकी प्रतीक्षा करते हुए प्राण धारण करना  »  श्लोक 54-55h
 
 
श्लोक  6.119.54-55h 
तत: शान्तनवो भीष्मो बीभत्सुं नात्यवर्तत॥ ५४॥
अथैनं पञ्चविंशत्या क्षुद्रकाणां समार्पयत्।
 
 
अनुवाद
तब शान्तनु नंदन भीष्म ने अर्जुन पर हाथ उठाना छोड़ दिया। तब भी अर्जुन ने उन्हें 25 बाण मारे।
 
Then Shantanu Nandan Bhishma stopped raising his hand against Arjuna. Even then Arjuna shot him with 25 arrows. 54 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)