श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 119: कौरवपक्षके प्रमुख महारथियोंद्वारा सुरक्षित होनेपर भी अर्जुनका भीष्मको रथसे गिराना, शरशय्यापर स्थित भीष्मके समीप हंसरूपधारी ऋषियोंका आगमन एवं उनके कथनसे भीष्मका उत्तरायणकी प्रतीक्षा करते हुए प्राण धारण करना  »  श्लोक 49-50h
 
 
श्लोक  6.119.49-50h 
शिखण्डी तु रणे बाणान् यान् मुमोच महारथ:॥ ४९॥
न चक्रुस्ते रुजं तस्य रुक्मपुङ्खा: शिलाशिता:।
 
 
अनुवाद
महारथी शिखण्डी द्वारा युद्धस्थल में चलाये गये, तीक्ष्ण एवं गर्व से युक्त स्वर्ण पंखयुक्त बाण भीष्म के शरीर पर कोई घाव या पीड़ा नहीं पहुँचा सके।
 
The golden-feathered arrows, which were sharpened and mounted on pride, used by the great warrior Shikhandi on the battle-field could not cause any wound or pain to Bhishma's body.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)