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श्री महाभारत
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पर्व 6: भीष्म पर्व
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अध्याय 119: कौरवपक्षके प्रमुख महारथियोंद्वारा सुरक्षित होनेपर भी अर्जुनका भीष्मको रथसे गिराना, शरशय्यापर स्थित भीष्मके समीप हंसरूपधारी ऋषियोंका आगमन एवं उनके कथनसे भीष्मका उत्तरायणकी प्रतीक्षा करते हुए प्राण धारण करना
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श्लोक 47-48h
श्लोक
6.119.47-48h
एवमन्यैरपि भृशं विद्धॺमान: सहस्रश:॥ ४७॥
तानप्याशु शरैर्भीष्म: प्रविव्याध महारथ:।
अनुवाद
इसी प्रकार अन्य योद्धाओं ने भी भीष्म को हजारों बाणों से घायल कर दिया। तब महारथी भीष्म ने भी तुरन्त ही उन सबको अपने बाणों से बींध डाला।
Similarly, others also wounded Bhishma with thousands of arrows. Then the mighty warrior Bhishma also immediately pierced them all with his arrows.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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