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mahabharat 6.119.46-47h: तत्पश्चात् वह पुनः अत्यन्त क्रोधित हो गया और उसने शीघ्रतापूर्वक भीष्म पर सौ बाणों से आक्रमण किया, जिससे उनके शरीर के सभी अंगों और नाड़ियों पर चोट पहुँची।   |   mahabharat अध्याय 6.119: कौरवपक्षके प्रमुख महारथियोंद्वारा सुरक्षित होनेपर भी अर्जुनका भीष्मको रथसे गिराना, शरशय्यापर स्थित भीष्मके समीप हंसरूपधारी ऋषियोंका आगमन एवं उनके कथनसे भीष्मका उत्तरायणकी प्रतीक्षा करते हुए प्राण धारण करना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 119: कौरवपक्षके प्रमुख महारथियोंद्वारा सुरक्षित होनेपर भी अर्जुनका भीष्मको रथसे गिराना, शरशय्यापर स्थित भीष्मके समीप हंसरूपधारी ऋषियोंका आगमन एवं उनके कथनसे भीष्मका उत्तरायणकी प्रतीक्षा करते हुए प्राण धारण करना  »  श्लोक 46-47h
 
 
श्लोक  6.119.46-47h 
पुन: पुन: शतैरेनं त्वरमाणो धनंजय:॥ ४६॥
सर्वगात्रेषु संक्रुद्ध: सर्वमर्मस्वताडयत्।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् वह पुनः अत्यन्त क्रोधित हो गया और उसने शीघ्रतापूर्वक भीष्म पर सौ बाणों से आक्रमण किया, जिससे उनके शरीर के सभी अंगों और नाड़ियों पर चोट पहुँची।
 
Thereafter, he again became very angry and quickly attacked Bhishma with a hundred arrows, striking him on all his body parts and vital spots. 46 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)