Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.119.44-45h: नरेश्वर! युद्ध में शिखण्डी द्वारा आहत होने पर भी कुरुवंश के पितामह भीष्म उसी प्रकार नहीं काँपे, जैसे भूकम्प आने पर भी पर्वत नहीं काँपता॥44 1/2॥ | mahabharat अध्याय 6.119: कौरवपक्षके प्रमुख महारथियोंद्वारा सुरक्षित होनेपर भी अर्जुनका भीष्मको रथसे गिराना, शरशय्यापर स्थित भीष्मके समीप हंसरूपधारी ऋषियोंका आगमन एवं उनके कथनसे भीष्मका उत्तरायणकी प्रतीक्षा करते हुए प्राण धारण करना । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स तेनाभिहत: संख्ये भीष्म: कुरुपितामह:॥ ४४॥
नाकम्पत महाराज क्षितिकम्पे यथाचल:।
अनुवाद
नरेश्वर! युद्ध में शिखण्डी द्वारा आहत होने पर भी कुरुवंश के पितामह भीष्म उसी प्रकार नहीं काँपे, जैसे भूकम्प आने पर भी पर्वत नहीं काँपता॥44 1/2॥
Nareshwar! Even after being hurt by Shikhandi in the war, Bhishma, the grandfather of Kuru dynasty, did not tremble in the same way as a mountain does not shake even after an earthquake. 44 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥