vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 6: भीष्म पर्व
»
अध्याय 119: कौरवपक्षके प्रमुख महारथियोंद्वारा सुरक्षित होनेपर भी अर्जुनका भीष्मको रथसे गिराना, शरशय्यापर स्थित भीष्मके समीप हंसरूपधारी ऋषियोंका आगमन एवं उनके कथनसे भीष्मका उत्तरायणकी प्रतीक्षा करते हुए प्राण धारण करना
»
श्लोक 43-44h
श्लोक
6.119.43-44h
शिखण्डी तु महाराज भरतानां पितामहम्॥ ४३॥
आजघानोरसि क्रुद्धो नवभिर्निशितै: शरै:।
अनुवाद
महाराज! उस समय शिखण्डी ने क्रोधित होकर भरतवंशी पितामह भीष्मजी की छाती में नौ तीखे बाण मारे॥43 1/2॥
Maharaj! At that time, Shikhandi became angry and shot nine sharp arrows in the chest of Bhishmaji, the grandfather of Bharatvanshi. 43 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×