श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 119: कौरवपक्षके प्रमुख महारथियोंद्वारा सुरक्षित होनेपर भी अर्जुनका भीष्मको रथसे गिराना, शरशय्यापर स्थित भीष्मके समीप हंसरूपधारी ऋषियोंका आगमन एवं उनके कथनसे भीष्मका उत्तरायणकी प्रतीक्षा करते हुए प्राण धारण करना  »  श्लोक 4-5h
 
 
श्लोक  6.119.4-5h 
स विशीर्णतनुत्राण: पीडितो बहुभिस्तदा॥ ४॥
न विव्यथे तदा भीष्मो भिद्यमानेषु मर्मसु।
 
 
अनुवाद
उस समय अनेक योद्धाओं द्वारा चलाए गए अनेक प्रकार के अस्त्र-शस्त्रों के कारण भीष्म का कवच छिन्न-भिन्न हो गया। यद्यपि उनके महत्वपूर्ण अंग छिद गए थे, फिर भी उन्हें कोई पीड़ा नहीं हुई।
 
At that time, Bhishma's armour was torn to pieces due to the many types of weapons used by the numerous warriors. Even though his vital parts were being pierced, he did not feel any pain. 4 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)