श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 119: कौरवपक्षके प्रमुख महारथियोंद्वारा सुरक्षित होनेपर भी अर्जुनका भीष्मको रथसे गिराना, शरशय्यापर स्थित भीष्मके समीप हंसरूपधारी ऋषियोंका आगमन एवं उनके कथनसे भीष्मका उत्तरायणकी प्रतीक्षा करते हुए प्राण धारण करना  »  श्लोक 28-30h
 
 
श्लोक  6.119.28-30h 
तां च चिक्षेप संक्रुद्ध: फाल्गुनस्य रथं प्रति।
तामापतन्तीं सम्प्रेक्ष्य ज्वलन्तीमशनीमिव॥ २८॥
समादत्त शितान् भल्लान् पञ्च पाण्डवनन्दन:।
तस्य चिच्छेद तां शक्तिं पञ्चधा पञ्चभि: शरै:॥ २९॥
संक्रुद्धो भरतश्रेष्ठ भीष्मबाहुप्रवेरिताम्।
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! तब उन्होंने क्रोध में आकर उसे अर्जुन के रथ की ओर भेजा। उस शक्ति को प्रज्वलित वज्र के समान आते देख पाण्डवों को प्रसन्न करने वाले अर्जुन ने हाथ में पाँच तीखे भल्ल नामक बाण लिए और क्रोध में आकर उन पाँच बाणों से भीष्म की भुजाओं द्वारा भेजी हुई उस शक्ति के पाँच टुकड़े कर दिए।
 
O best of the Bharatas! Then in anger he sent it towards Arjuna's chariot. Seeing that Shakti coming like a blazing thunderbolt, Arjuna, who makes the Pandavas happy, took in his hand five sharp arrows called Bhall and in anger he broke the Shakti, which had been sent by Bhishma's arms, into five pieces with those five arrows. 28-29 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)