श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 119: कौरवपक्षके प्रमुख महारथियोंद्वारा सुरक्षित होनेपर भी अर्जुनका भीष्मको रथसे गिराना, शरशय्यापर स्थित भीष्मके समीप हंसरूपधारी ऋषियोंका आगमन एवं उनके कथनसे भीष्मका उत्तरायणकी प्रतीक्षा करते हुए प्राण धारण करना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  6.119.26 
एवं स पाण्डव: क्रुद्ध आत्तमात्तं पुन: पुन:।
धनुश्चिच्छेद भीष्मस्य सव्यसाची परंतप:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार क्रोध में भरकर शत्रु-तृप्त पाण्डु नन्दन अर्जुन ने भीष्म द्वारा जो भी धनुष हाथ में लिया, उसे काट डाला ॥26॥
 
In this way, filled with anger, the enemy-satisfied Pandu Nandan Arjun cut off whatever bow Bhishma took. 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)