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mahabharat 6.119.17-18h: अर्जुन पर आक्रमण करते समय उन योद्धाओं की गर्जना वैसी ही सुनाई दे रही थी, जैसे प्रलयकाल में अपनी सीमा से बाहर उठे हुए समुद्रों की गर्जना सुनाई देती है।   |   mahabharat अध्याय 6.119: कौरवपक्षके प्रमुख महारथियोंद्वारा सुरक्षित होनेपर भी अर्जुनका भीष्मको रथसे गिराना, शरशय्यापर स्थित भीष्मके समीप हंसरूपधारी ऋषियोंका आगमन एवं उनके कथनसे भीष्मका उत्तरायणकी प्रतीक्षा करते हुए प्राण धारण करना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 119: कौरवपक्षके प्रमुख महारथियोंद्वारा सुरक्षित होनेपर भी अर्जुनका भीष्मको रथसे गिराना, शरशय्यापर स्थित भीष्मके समीप हंसरूपधारी ऋषियोंका आगमन एवं उनके कथनसे भीष्मका उत्तरायणकी प्रतीक्षा करते हुए प्राण धारण करना  »  श्लोक 17-18h
 
 
श्लोक  6.119.17-18h 
तेषामापततां शब्द: शुश्रुवे फाल्गुनं प्रति॥ १७॥
उद्‍वृत्तानां यथा शब्द: समुद्राणां युगक्षये।
 
 
अनुवाद
अर्जुन पर आक्रमण करते समय उन योद्धाओं की गर्जना वैसी ही सुनाई दे रही थी, जैसे प्रलयकाल में अपनी सीमा से बाहर उठे हुए समुद्रों की गर्जना सुनाई देती है।
 
The roar of those warriors while attacking Arjuna was heard in the same manner as the roar of the rising oceans beyond their limits during the time of deluge. 17 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)