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श्री महाभारत
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पर्व 6: भीष्म पर्व
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अध्याय 119: कौरवपक्षके प्रमुख महारथियोंद्वारा सुरक्षित होनेपर भी अर्जुनका भीष्मको रथसे गिराना, शरशय्यापर स्थित भीष्मके समीप हंसरूपधारी ऋषियोंका आगमन एवं उनके कथनसे भीष्मका उत्तरायणकी प्रतीक्षा करते हुए प्राण धारण करना
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श्लोक 120
श्लोक
6.119.120
क्षत्रं चान्येऽभ्यनिन्दन्त भीष्मं चान्येऽभ्यपूजयन्।
ऋषय: पितरश्चैव प्रशशंसुर्महाव्रतम्॥ १२०॥
अनुवाद
कुछ लोग क्षात्रधर्म की निन्दा कर रहे थे और कुछ लोग भीष्मजी की प्रशंसा कर रहे थे। ऋषियों और पितरों ने भी महान भक्त भीष्म की स्तुति की॥120॥
Some people were criticising the Kshatradharma and some were praising Bhishmaji. The sages and ancestors praised the great devotee Bhishma.॥ 120॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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