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mahabharat 6.119.12-13h: महारथी शिखण्डी के द्वारा चलाए गए महान बाणों में सुवर्णमय पंख लगे थे और वे शिला पर रगड़कर तीखे बनाए गए थे; फिर भी वे भीष्म के शरीर को न तो घायल कर सके और न पीड़ा पहुँचा सके॥12 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 6.119: कौरवपक्षके प्रमुख महारथियोंद्वारा सुरक्षित होनेपर भी अर्जुनका भीष्मको रथसे गिराना, शरशय्यापर स्थित भीष्मके समीप हंसरूपधारी ऋषियोंका आगमन एवं उनके कथनसे भीष्मका उत्तरायणकी प्रतीक्षा करते हुए प्राण धारण करना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 119: कौरवपक्षके प्रमुख महारथियोंद्वारा सुरक्षित होनेपर भी अर्जुनका भीष्मको रथसे गिराना, शरशय्यापर स्थित भीष्मके समीप हंसरूपधारी ऋषियोंका आगमन एवं उनके कथनसे भीष्मका उत्तरायणकी प्रतीक्षा करते हुए प्राण धारण करना  »  श्लोक 12-13h
 
 
श्लोक  6.119.12-13h 
शिखण्डी तु महाबाणान् यान् मुमोच महारथ:॥ १२॥
न चक्रुस्ते रुजं तस्य स्वर्णपङ्खा: शिलाशिता:।
 
 
अनुवाद
महारथी शिखण्डी के द्वारा चलाए गए महान बाणों में सुवर्णमय पंख लगे थे और वे शिला पर रगड़कर तीखे बनाए गए थे; फिर भी वे भीष्म के शरीर को न तो घायल कर सके और न पीड़ा पहुँचा सके॥12 1/2॥
 
The great arrows used by the great warrior Shikhandi had golden feathers on them and were sharpened by rubbing them on a rock; yet they could not cause any wound or pain to Bhishma's body. ॥12 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)