श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 119: कौरवपक्षके प्रमुख महारथियोंद्वारा सुरक्षित होनेपर भी अर्जुनका भीष्मको रथसे गिराना, शरशय्यापर स्थित भीष्मके समीप हंसरूपधारी ऋषियोंका आगमन एवं उनके कथनसे भीष्मका उत्तरायणकी प्रतीक्षा करते हुए प्राण धारण करना  »  श्लोक 117-118h
 
 
श्लोक  6.119.117-118h 
सोमकाश्च सपञ्चाला: प्राहृष्यन्त जनेश्वर।
ततस्तूर्यसहस्रेषु नदत्सु स महाबल:॥ ११७॥
आस्फोटयामास भृशं भीमसेनो ननाद च।
 
 
अनुवाद
हे जनेश्वर! पांचाल और सोमकों के हर्ष की सीमा न रही। हजारों युद्ध-वाद्य बजने लगे। उस समय महाबली भीमसेन जोर-जोर से हाथ पटकने लगे और सिंह के समान गर्जना करने लगे।
 
O Janeshwar! The joy of the Panchalas and the Somakas knew no bounds. Thousands of war instruments began to play. At that time the mighty Bhimsena began to beat his hands loudly and roar like a lion.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)