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mahabharat 6.119.114: राजन! शान्तनुपुत्र महाबली भीष्म असमय ही मारे गए, फिर भी उनका वध हो गया। इससे सबने सहसा यह मान लिया कि कुरुराज दुर्योधन का विनाश भी अवश्यम्भावी है ॥114॥   |   mahabharat अध्याय 6.119: कौरवपक्षके प्रमुख महारथियोंद्वारा सुरक्षित होनेपर भी अर्जुनका भीष्मको रथसे गिराना, शरशय्यापर स्थित भीष्मके समीप हंसरूपधारी ऋषियोंका आगमन एवं उनके कथनसे भीष्मका उत्तरायणकी प्रतीक्षा करते हुए प्राण धारण करना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 119: कौरवपक्षके प्रमुख महारथियोंद्वारा सुरक्षित होनेपर भी अर्जुनका भीष्मको रथसे गिराना, शरशय्यापर स्थित भीष्मके समीप हंसरूपधारी ऋषियोंका आगमन एवं उनके कथनसे भीष्मका उत्तरायणकी प्रतीक्षा करते हुए प्राण धारण करना  »  श्लोक 114
 
 
श्लोक  6.119.114 
अवध्ये शन्तनो: पुत्रे हते भीष्मे महौजसि।
अभाव: सहसा राजन् कुरुराजस्य तर्कित:॥ ११४॥
 
 
अनुवाद
राजन! शान्तनुपुत्र महाबली भीष्म असमय ही मारे गए, फिर भी उनका वध हो गया। इससे सबने सहसा यह मान लिया कि कुरुराज दुर्योधन का विनाश भी अवश्यम्भावी है ॥114॥
 
Rajan! Shantanu's son Bhishma, the great luminary, was untimely, yet he was killed. Due to this, everyone suddenly assumed that the destruction of Kururaj Duryodhana was also inevitable. 114॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)