श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 119: कौरवपक्षके प्रमुख महारथियोंद्वारा सुरक्षित होनेपर भी अर्जुनका भीष्मको रथसे गिराना, शरशय्यापर स्थित भीष्मके समीप हंसरूपधारी ऋषियोंका आगमन एवं उनके कथनसे भीष्मका उत्तरायणकी प्रतीक्षा करते हुए प्राण धारण करना  »  श्लोक 106
 
 
श्लोक  6.119.106 
धारयिष्याम्यहं प्राणानुत्तरायणकाङ्क्षया।
ऐश्वर्यभूत: प्राणानामुत्सर्गो हि यतो मम॥ १०६॥
 
 
अनुवाद
मैं उत्तरायण आने की प्रतीक्षा करूँगा और अपने प्राणों को धारण करूँगा, क्योंकि मुझमें जब चाहूँ प्राण त्यागने की शक्ति है ॥106॥
 
I shall wait for Uttarayan to come and hold on to my life, for I have the power to give up my life whenever I wish.॥ 106॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)