श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 119: कौरवपक्षके प्रमुख महारथियोंद्वारा सुरक्षित होनेपर भी अर्जुनका भीष्मको रथसे गिराना, शरशय्यापर स्थित भीष्मके समीप हंसरूपधारी ऋषियोंका आगमन एवं उनके कथनसे भीष्मका उत्तरायणकी प्रतीक्षा करते हुए प्राण धारण करना  »  श्लोक 105
 
 
श्लोक  6.119.105 
गमिष्यामि स्वकं स्थानमासीद् यन्मे पुरातनम्।
उदगायन आदित्ये हंसा: सत्यं ब्रवीमि व:॥ १०५॥
 
 
अनुवाद
हंसो ! जब सूर्य उत्तर दिशा में जाएगा, तभी मैं उस लोक में जाऊँगा, जो मेरा प्राचीन स्थान है । मैं तुमसे सत्य कहता हूँ ॥105॥
 
‘Laugh! Only when the Sun moves northwards will I travel to that world, which is my ancient place. I am telling you the truth.॥ 105॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)