vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 6: भीष्म पर्व
»
अध्याय 119: कौरवपक्षके प्रमुख महारथियोंद्वारा सुरक्षित होनेपर भी अर्जुनका भीष्मको रथसे गिराना, शरशय्यापर स्थित भीष्मके समीप हंसरूपधारी ऋषियोंका आगमन एवं उनके कथनसे भीष्मका उत्तरायणकी प्रतीक्षा करते हुए प्राण धारण करना
»
श्लोक 102-103h
श्लोक
6.119.102-103h
भीष्म: कथं महात्मा सन् संस्थाता दक्षिणायने॥ १०२॥
इत्युक्त्वा प्रस्थिता हंसा दक्षिणामभितो दिशम्।
अनुवाद
महात्मा होकर भीष्म दक्षिण गोलार्ध में मृत्यु को कैसे स्वीकार कर सकते हैं?’ ऐसा कहकर हंसों का समूह दक्षिण की ओर चला गया।
Being a great soul, how can Bhishma accept death in the southern hemisphere?' saying this the group of swans went towards the south. 102 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×