श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 119: कौरवपक्षके प्रमुख महारथियोंद्वारा सुरक्षित होनेपर भी अर्जुनका भीष्मको रथसे गिराना, शरशय्यापर स्थित भीष्मके समीप हंसरूपधारी ऋषियोंका आगमन एवं उनके कथनसे भीष्मका उत्तरायणकी प्रतीक्षा करते हुए प्राण धारण करना  »  श्लोक 102-103h
 
 
श्लोक  6.119.102-103h 
भीष्म: कथं महात्मा सन् संस्थाता दक्षिणायने॥ १०२॥
इत्युक्त्वा प्रस्थिता हंसा दक्षिणामभितो दिशम्।
 
 
अनुवाद
महात्मा होकर भीष्म दक्षिण गोलार्ध में मृत्यु को कैसे स्वीकार कर सकते हैं?’ ऐसा कहकर हंसों का समूह दक्षिण की ओर चला गया।
 
Being a great soul, how can Bhishma accept death in the southern hemisphere?' saying this the group of swans went towards the south. 102 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)