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mahabharat 6.118.36: जहाँ वे इस सेना का संहार कर रहे हैं, वहाँ जाकर उन्हें बलपूर्वक स्तब्ध कर दो (ताकि वे आगे-पीछे न बढ़ सकें)। हे विभु! तुम्हारे अतिरिक्त ऐसा कोई नहीं है जो भीष्म के बाणों की मार को सहन कर सके।'   |   mahabharat अध्याय 6.118: भीष्मका अद्भुत पराक्रम करते हुए पाण्डव-सेनाका भीषण संहार   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 118: भीष्मका अद्भुत पराक्रम करते हुए पाण्डव-सेनाका भीषण संहार  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  6.118.36 
बलात् संस्तम्भयस्वैनं यत्रैषा भिद्यते चमू:।
न हि भीष्मशरानन्य: सोढुमुत्सहते विभो॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
जहाँ वे इस सेना का संहार कर रहे हैं, वहाँ जाकर उन्हें बलपूर्वक स्तब्ध कर दो (ताकि वे आगे-पीछे न बढ़ सकें)। हे विभु! तुम्हारे अतिरिक्त ऐसा कोई नहीं है जो भीष्म के बाणों की मार को सहन कर सके।'
 
Go to the place where they are killing this army and stun them with force (so that they cannot move forward or backward). O Vibhu! There is no one except you who can withstand the blows of Bhishma's arrows.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)