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mahabharat 6.118.30: इस प्रकार भीष्म ने दसों दिशाओं में अपने बाणों का जाल फैला दिया और कुंतीपुत्रों की सेना को परास्त करके स्वयं सेना के मुख्य भाग में स्थान ग्रहण किया।   |   mahabharat अध्याय 6.118: भीष्मका अद्भुत पराक्रम करते हुए पाण्डव-सेनाका भीषण संहार   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 118: भीष्मका अद्भुत पराक्रम करते हुए पाण्डव-सेनाका भीषण संहार  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  6.118.30 
एवं दश दिशो भीष्म: शरजालै: समन्तत:।
अतीत्य सेनां पार्थानामवतस्थे चमूमुखे॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार भीष्म ने दसों दिशाओं में अपने बाणों का जाल फैला दिया और कुंतीपुत्रों की सेना को परास्त करके स्वयं सेना के मुख्य भाग में स्थान ग्रहण किया।
 
In this way Bhishma spread out a net of his arrows in all the ten directions and after defeating the army of Kunti's sons he took position in the main part of the army.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)