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mahabharat 6.118.18-19h: सेनापति के ये वचन सुनकर वीर योद्धा सोमक और संजय बाणों की भारी वर्षा से घायल होते हुए भी गंगापुत्र भीष्म की ओर दौड़े।   |   mahabharat अध्याय 6.118: भीष्मका अद्भुत पराक्रम करते हुए पाण्डव-सेनाका भीषण संहार   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 118: भीष्मका अद्भुत पराक्रम करते हुए पाण्डव-सेनाका भीषण संहार  »  श्लोक 18-19h
 
 
श्लोक  6.118.18-19h 
सेनापतिवच: श्रुत्वा सोमका: सृञ्जयाश्च ते॥ १८॥
अभ्यद्रवन्त गाङ्गेयं शरवृष्टॺा समाहता:।
 
 
अनुवाद
सेनापति के ये वचन सुनकर वीर योद्धा सोमक और संजय बाणों की भारी वर्षा से घायल होते हुए भी गंगापुत्र भीष्म की ओर दौड़े।
 
On hearing these words from the Commander-in-Chief, the brave warriors Somaka and Sanjaya, despite being wounded by a heavy shower of arrows, ran towards Ganga's son Bhishma. 18 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)