श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 117: उभय पक्षकी सेनाओंका युद्ध, दु:शासनका पराक्रम तथा अर्जुनके द्वारा भीष्मका मूर्च्छित होना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  6.117.8 
अचिन्तयित्वा तान् बाणान् पिता देवव्रतस्तव।
अर्जुनं समरे क्रुद्धं वारयामास सायकै:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
परन्तु आपके पितातुल्य देवव्रत ने उन बाणों की परवाह न करके युद्ध में क्रोधित अर्जुन को अपने ही बाणों से रोक दिया।
 
But your fatherly figure Devavrata did not care about those arrows and stopped the enraged Arjuna in the battle with his own arrows. 8.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)