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mahabharat 6.117.7: भरतश्रेष्ठ! अर्जुन के ऐसा कहने पर शिखण्डी ने तुरन्त ही पितामह भीष्म पर नाना प्रकार के बाणों की वर्षा आरम्भ कर दी॥7॥   |   mahabharat अध्याय 6.117: उभय पक्षकी सेनाओंका युद्ध, दु:शासनका पराक्रम तथा अर्जुनके द्वारा भीष्मका मूर्च्छित होना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 117: उभय पक्षकी सेनाओंका युद्ध, दु:शासनका पराक्रम तथा अर्जुनके द्वारा भीष्मका मूर्च्छित होना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  6.117.7 
एवमुक्तस्तु पार्थेन शिखण्डी भरतर्षभ।
शरैर्नानाविधैस्तूर्णं पितामहमवाकिरत्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
भरतश्रेष्ठ! अर्जुन के ऐसा कहने पर शिखण्डी ने तुरन्त ही पितामह भीष्म पर नाना प्रकार के बाणों की वर्षा आरम्भ कर दी॥7॥
 
Bharatshrestha! When Arjuna said this, Shikhandi immediately started showering various types of arrows on grandfather Bhishma. 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)