Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 6.117.59: सोने के हार चारों ओर बिखरे पड़े थे, और बहुमूल्य झंडे अचानक हवा से लहराते हुए दिखाई दिए।   |   mahabharat अध्याय 6.117: उभय पक्षकी सेनाओंका युद्ध, दु:शासनका पराक्रम तथा अर्जुनके द्वारा भीष्मका मूर्च्छित होना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 117: उभय पक्षकी सेनाओंका युद्ध, दु:शासनका पराक्रम तथा अर्जुनके द्वारा भीष्मका मूर्च्छित होना  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  6.117.59 
काञ्चनानि च दामानि पताकाश्च महाधना:।
धूयमाना व्यदृश्यन्त सहसा मारुतेरिता:॥ ५९॥
 
 
अनुवाद
सोने के हार चारों ओर बिखरे पड़े थे, और बहुमूल्य झंडे अचानक हवा से लहराते हुए दिखाई दिए।
 
Gold necklaces were scattered about, and precious flags appeared suddenly fluttering, driven by the wind. 59.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)