vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 6: भीष्म पर्व
»
अध्याय 117: उभय पक्षकी सेनाओंका युद्ध, दु:शासनका पराक्रम तथा अर्जुनके द्वारा भीष्मका मूर्च्छित होना
»
श्लोक 58
श्लोक
6.117.58
ववुर्बहुविधाश्चैव दिक्षु सर्वासु मारुता:।
दृश्यमानेषु रक्ष:सु भूतेषु च नदत्सु च॥ ५८॥
अनुवाद
सब ओर नाना प्रकार की वायु बह रही थी, राक्षस और भूत-प्रेत सर्वत्र गर्जना करते दिखाई दे रहे थे।
Various types of winds were blowing in all directions. Demons and ghosts could be seen roaring everywhere. 58.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×