श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 117: उभय पक्षकी सेनाओंका युद्ध, दु:शासनका पराक्रम तथा अर्जुनके द्वारा भीष्मका मूर्च्छित होना  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  6.117.58 
ववुर्बहुविधाश्चैव दिक्षु सर्वासु मारुता:।
दृश्यमानेषु रक्ष:सु भूतेषु च नदत्सु च॥ ५८॥
 
 
अनुवाद
सब ओर नाना प्रकार की वायु बह रही थी, राक्षस और भूत-प्रेत सर्वत्र गर्जना करते दिखाई दे रहे थे।
 
Various types of winds were blowing in all directions. Demons and ghosts could be seen roaring everywhere. 58.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)