श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 117: उभय पक्षकी सेनाओंका युद्ध, दु:शासनका पराक्रम तथा अर्जुनके द्वारा भीष्मका मूर्च्छित होना  »  श्लोक 57
 
 
श्लोक  6.117.57 
श्वान: काकाश्च गृध्राश्च वृका गोमायुभि: सह।
प्रणेदुर्भक्ष्यमासाद्य विकृताश्च मृगद्विजा:॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
कुत्ते, कौवे, गिद्ध, भेड़िये, सियार तथा अन्य हिंसक पशु-पक्षी वहाँ अपना भोजन पाकर प्रसन्नता से दहाड़ने लगे।
 
Dogs, crows, vultures, wolves, jackals and other ferocious animals and birds started roaring with joy after getting their food there. 57.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)