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mahabharat 6.117.56: हाथियों, घोड़ों और रथियों के रक्त से भीगा हुआ सम्पूर्ण युद्धक्षेत्र शरद ऋतु की संध्या के लाल बादलों के समान सुन्दर लग रहा था।   |   mahabharat अध्याय 6.117: उभय पक्षकी सेनाओंका युद्ध, दु:शासनका पराक्रम तथा अर्जुनके द्वारा भीष्मका मूर्च्छित होना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 117: उभय पक्षकी सेनाओंका युद्ध, दु:शासनका पराक्रम तथा अर्जुनके द्वारा भीष्मका मूर्च्छित होना  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  6.117.56 
तद् गजाश्वरथौघानां रुधिरेण समुक्षितम्।
छन्नमायोधनं रेजे रक्ताभ्रमिव शारदम्॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
हाथियों, घोड़ों और रथियों के रक्त से भीगा हुआ सम्पूर्ण युद्धक्षेत्र शरद ऋतु की संध्या के लाल बादलों के समान सुन्दर लग रहा था।
 
The entire battlefield, covered and soaked in the blood of the elephants, horses and charioteers, looked as beautiful as the red clouds of an autumn evening. 56.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)