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mahabharat 6.117.55: हर जगह हाथी और सारथी गिर रहे थे। कई रथ ज़मीन पर बिखरे पड़े थे, उनके पहिये, जूए और झंडे टूट गए थे।   |   mahabharat अध्याय 6.117: उभय पक्षकी सेनाओंका युद्ध, दु:शासनका पराक्रम तथा अर्जुनके द्वारा भीष्मका मूर्च्छित होना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 117: उभय पक्षकी सेनाओंका युद्ध, दु:शासनका पराक्रम तथा अर्जुनके द्वारा भीष्मका मूर्च्छित होना  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  6.117.55 
गजाश्च रथयोधाश्च परिपेतु: समन्तत:।
विकीर्णाश्च रथा भूमौ भग्नचक्रयुगध्वजा:॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
हर जगह हाथी और सारथी गिर रहे थे। कई रथ ज़मीन पर बिखरे पड़े थे, उनके पहिये, जूए और झंडे टूट गए थे।
 
Everywhere elephants and charioteers were falling down. Many chariots were lying scattered on the ground with their wheels, yokes and flags broken.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)