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mahabharat 6.117.54: उनमें से बहुत से रथों के पहियों से कटकर गिर गए, बहुत से हाथियों ने अपनी सूँड़ से पकड़कर ज़मीन पर पटक दिए। बहुत से पैदल सैनिक और घुड़सवार अपने घोड़ों समेत वहाँ से भाग गए।   |   mahabharat अध्याय 6.117: उभय पक्षकी सेनाओंका युद्ध, दु:शासनका पराक्रम तथा अर्जुनके द्वारा भीष्मका मूर्च्छित होना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 117: उभय पक्षकी सेनाओंका युद्ध, दु:शासनका पराक्रम तथा अर्जुनके द्वारा भीष्मका मूर्च्छित होना  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  6.117.54 
रथनेमिनिकृत्तैश्च गजैश्चैवावपोथितै:।
पादाताश्चाप्यधावन्त साश्वाश्च हययोधिन:॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
उनमें से बहुत से रथों के पहियों से कटकर गिर गए, बहुत से हाथियों ने अपनी सूँड़ से पकड़कर ज़मीन पर पटक दिए। बहुत से पैदल सैनिक और घुड़सवार अपने घोड़ों समेत वहाँ से भाग गए।
 
Many of them were cut down by the wheels of the chariots, many were caught by the elephants with their trunks and thrown on the ground. Many infantry soldiers and horse-riders fled from there along with their horses.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)