vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 6: भीष्म पर्व
»
अध्याय 117: उभय पक्षकी सेनाओंका युद्ध, दु:शासनका पराक्रम तथा अर्जुनके द्वारा भीष्मका मूर्च्छित होना
»
श्लोक 48-49h
श्लोक
6.117.48-49h
तथैव शरवर्षेण भास्करो रश्मिवानिव॥ ४८॥
अन्यानपि महाराज तापयामास पार्थिवान्।
अनुवाद
महाराज! इसी प्रकार वह सूर्य के समान अन्य राजाओं को भी बाणों की वर्षा से पीड़ित करने लगा।
Maharaj! In the same way, he started tormenting other kings also who were like the Sun with the shower of his arrows. 48 1/2
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×