श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 117: उभय पक्षकी सेनाओंका युद्ध, दु:शासनका पराक्रम तथा अर्जुनके द्वारा भीष्मका मूर्च्छित होना  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  6.117.45 
कृपं विकर्णं शल्यं च विद्‍ध्वा बहुभिरायसै:।
चकार विरथांश्चैव कौन्तेय: श्वेतवाहन:॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् श्वेतवाहिनी कुन्तीकुमार अर्जुन ने कृपाचार्य, विकर्ण और शल्य को भी लोहे के बहुत से बाणों द्वारा रथहीन कर दिया ॥45॥
 
Thereafter, Kuntikumar Arjun, the white-carrier, made Kripacharya, Vikarna and Shalya also chariotless with many arrows made of iron. 45॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)