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mahabharat 6.117.43-44: तत्पश्चात् पराक्रमी अर्जुन ने दु:शासन के घोड़ों और सारथि को मार डाला, विविंशति को भी बीस बाणों से घायल कर दिया, जिससे वह रथहीन हो गया। तत्पश्चात् पाँच मुड़े हुए बाणों से उसे पुनः गंभीर रूप से घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 6.117: उभय पक्षकी सेनाओंका युद्ध, दु:शासनका पराक्रम तथा अर्जुनके द्वारा भीष्मका मूर्च्छित होना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 117: उभय पक्षकी सेनाओंका युद्ध, दु:शासनका पराक्रम तथा अर्जुनके द्वारा भीष्मका मूर्च्छित होना  »  श्लोक 43-44
 
 
श्लोक  6.117.43-44 
हयांश्चास्य ततो जघ्ने सारथिं च न्यपातयत्॥ ४३॥
विविंशतिं च विंशत्या विरथं कृतवान् प्रभु:।
आजघान भृशं चैव पञ्चभिर्नतपर्वभि:॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् पराक्रमी अर्जुन ने दु:शासन के घोड़ों और सारथि को मार डाला, विविंशति को भी बीस बाणों से घायल कर दिया, जिससे वह रथहीन हो गया। तत्पश्चात् पाँच मुड़े हुए बाणों से उसे पुनः गंभीर रूप से घायल कर दिया।
 
Thereafter the powerful Arjuna killed Dushasan's horses and charioteer and also slashed Vivinshati with twenty arrows, leaving him chariotless. After this he again wounded him severely with five arrows having bent ends.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)