श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 117: उभय पक्षकी सेनाओंका युद्ध, दु:शासनका पराक्रम तथा अर्जुनके द्वारा भीष्मका मूर्च्छित होना  »  श्लोक 42-43h
 
 
श्लोक  6.117.42-43h 
ते तु भित्त्वा तव सुतं दु:शासनमयोमुखा:॥ ४२॥
धरणीं विविशु: सर्वे वल्मीकमिव पन्नगा:।
 
 
अनुवाद
वे सब लोहे के मुख वाले बाण आपके पुत्र दु:शासन को बींधकर उसी प्रकार पृथ्वी में समा गए, जैसे सर्प बिल में घुस जाते हैं॥42 1/2॥
 
All those iron-headed arrows, after piercing your son Dushasan, entered the earth in the same manner as snakes enter a hole. ॥ 42 1/2 ॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)