श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 117: उभय पक्षकी सेनाओंका युद्ध, दु:शासनका पराक्रम तथा अर्जुनके द्वारा भीष्मका मूर्च्छित होना  »  श्लोक 31-32h
 
 
श्लोक  6.117.31-32h 
तच्छ्रुत्वा तु वचो राजंस्तव पुत्रस्य धन्विन:॥ ३१॥
सर्वे योधा: सुसंरब्धा बलवन्तो महाबला:।
 
 
अनुवाद
हे राजन! आपके धनुर्धर पुत्र के ये आवेशपूर्ण वचन सुनकर वे सभी महाबली और पराक्रमी योद्धा क्रोध से भर गए॥31 1/2॥
 
O King! Hearing these passionate words of your archer son, all those mighty and powerful warriors were filled with anger. ॥ 31 1/2 ॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)