श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 117: उभय पक्षकी सेनाओंका युद्ध, दु:शासनका पराक्रम तथा अर्जुनके द्वारा भीष्मका मूर्च्छित होना  »  श्लोक 30-31h
 
 
श्लोक  6.117.30-31h 
तस्माद् द्रवत मा योधा: फाल्गुनं प्राप्य संयुगे।
अहमद्य रणे यत्तो योधयिष्यामि पाण्डवम्॥ ३०॥
सहित: सर्वतो यत्तैर्भवद्भिर्वसुधाधिपै:।
 
 
अनुवाद
अतः वीरों! युद्धभूमि में अर्जुन को सामने देखकर भाग मत जाना। मैं स्वयं आज समरांगण में पाण्डुकुमार अर्जुन के साथ युद्ध करूँगा। तुम सब राजा सब ओर से सावधान रहो और मेरे साथ रहो। 30 1/2॥
 
So warriors! Do not run away after seeing Arjun in front of you on the battlefield. I myself will fight with Pandukumar Arjun today in Samarangan. All you kings, be careful from all sides and stay with me. 30 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)