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उष्णार्तो हि नरो यद्वज्जलधारा: प्रतीच्छति।
तथा जग्राह गाङ्गेय: शरधारा: शिखण्डिन:॥ २४॥
अनुवाद
जिस प्रकार गर्मी से पीड़ित व्यक्ति अपने ऊपर जल की धारा ग्रहण कर लेता है, उसी प्रकार गंगापुत्र भीष्म शिखंडी के बाणों की धारा ग्रहण कर रहे थे।
Just as a person suffering from heat receives a stream of water on himself, in the same way Ganga's son Bhishma was receiving the stream of arrows from Shikhandi.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥