Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.117.23: परन्तु हे जनेश्वर! उनके द्वारा छोड़े गए बाण आपके चाचा के शरीर में कोई घाव या पीड़ा उत्पन्न नहीं कर पाए। उस समय गंगानन्दन भीष्म मुस्कुरा रहे थे और उन बाणों के प्रहार सहन कर रहे थे। | mahabharat अध्याय 6.117: उभय पक्षकी सेनाओंका युद्ध, दु:शासनका पराक्रम तथा अर्जुनके द्वारा भीष्मका मूर्च्छित होना । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न च स्म ते रुजं चक्रु: पितुस्तव जनेश्वर।
स्मयमानस्तु गाङ्गेयस्तान् बाणाञ्जगृहे तदा॥ २३॥
अनुवाद
परन्तु हे जनेश्वर! उनके द्वारा छोड़े गए बाण आपके चाचा के शरीर में कोई घाव या पीड़ा उत्पन्न नहीं कर पाए। उस समय गंगानन्दन भीष्म मुस्कुरा रहे थे और उन बाणों के प्रहार सहन कर रहे थे।
But, O Janeshwar! The arrows shot by him were not able to cause any wound or pain in your uncle's body. At that time, Ganganandan Bhishma was smiling and bearing the blows of those arrows.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥