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mahabharat 6.117.22: महाराज! उस समय युद्धस्थल में शिखण्डी ने पितामह भीष्म को वज्र के समान प्रबल तथा सर्पविष के समान घातक बाणों से घायल करना आरम्भ किया।   |   mahabharat अध्याय 6.117: उभय पक्षकी सेनाओंका युद्ध, दु:शासनका पराक्रम तथा अर्जुनके द्वारा भीष्मका मूर्च्छित होना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 117: उभय पक्षकी सेनाओंका युद्ध, दु:शासनका पराक्रम तथा अर्जुनके द्वारा भीष्मका मूर्च्छित होना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  6.117.22 
शिखण्डी तु रणे राजन् विव्याधैव पितामहम्।
शरैरशनिसंस्पर्शैस्तथा सर्पविषोपमै:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
महाराज! उस समय युद्धस्थल में शिखण्डी ने पितामह भीष्म को वज्र के समान प्रबल तथा सर्पविष के समान घातक बाणों से घायल करना आरम्भ किया।
 
Maharaj! At that time, on the battlefield, Shikhandi began wounding Grandfather Bhishma with arrows that were as strong as thunderbolts and as deadly as serpent venom.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)