श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 117: उभय पक्षकी सेनाओंका युद्ध, दु:शासनका पराक्रम तथा अर्जुनके द्वारा भीष्मका मूर्च्छित होना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  6.117.2 
शिखण्डिनं तु गाङ्गेय: क्रोधदीप्तेन चक्षुषा।
सम्प्रैक्षत कटाक्षेण निर्दहन्निव भारत॥ २॥
 
 
अनुवाद
भारत गंगानन्दन भीष्म ने क्रोध से जलती हुई आँखों से शिखण्डी की ओर देखा, मानो उसे जलाकर भस्म कर देंगे॥2॥
 
India Ganganandan Bhishma looked at Shikhandi with his eyes burning with anger as if he would burn him to ashes. 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)